एक अगस्त 2010
की उस शाम
सेम से बंजर हुई जमीन पर उगे,
विलायती कीकरों
के बीच से गुजरते हुए
पता चला कि
रंगमहल के कुछ जोगी ‘बीण बाणा’ छोड़
करने लगे हैं दलाली
और घग्घर के किनारे
मणों टन माटी के ...
जेठ माह और उससे पहले की गर्मी में सूख सिकुड़ गए सपनों के बीजों को आषाढ़ की पहली बारिश में धो भिगोकर सपनों की चद्दर पर डाल दिया है. हवाओं की नमी से कुछ बूंदें पलकों पर जमी हैं. खेत में बाजरा बोना ...
ये रात, ये आवारगी और ये नींद का बोझ,
अपना घर होता तो घर गए होते.
आषाढ़ की पहली बारिश ने पेड़ पौधों से लेकर सड़क तक को धो दिया है. रात के साढेक दस बजे दफ्तर से निकला तो चतुर्दिक नमी और हवा में ...