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Syndicate contentगांव- गुवाड़

6 March, 2010 - 06:07

रेत ही रेत, ऊंट, दुर्जेय दुर्ग और बड़े-बड़े महल.. राजस्‍थान की बात करते समय आमतौर पर यही पांच दस शब्‍द हैं जो प्राय: कहे या सुने जाते हैं. वहां के गांवों, चकों और ढाणियों की बात कोई नहीं करता. ...
यह फागुन है. रात में बूंदा बांदी हुई थी और दिन में गर्मी ऐसी कि स्‍वेटर आदि भी पहनने का मन ना करे. पहनो तो तन को कीड़ी सी खाए. थार में दिन में भले ही गर्मी हो लेकिन रात सर्द होती है. ज्‍यूं ज्‍यूं ...
नीरज दइया के शब्‍दों में वे वक्‍त के साथ आगे बढ़ने वाले कवि हैं. वे चंद्र सिंह बिरकाळी के सबसे चहेते कवियों में रहे और तैस्‍सीतोरी के धोरे पर काव्‍य पाठ करने वाले कवियों में से एक हैं. कवि हैं और ...
एक थेहड़ है या माटी का ढेर. जिसके नीचे एक सभ्‍यता पाई गई; एक आबादी के संकेत और अवशेष मिले. यह बात आज तक भी समझ में नहीं आई कि कैसे एक विशाल और समृद्ध सभ्‍यता अचानक माटी के ढेर में दब गई. जैसे ...

6 February, 2010 - 14:57

‘थार की ढाणी’ का विमोचन नई दिल्‍ली. राजस्‍थान की ढाणियों व लोकजीवन पर लिखी गई किताब ‘थार की ढाणी’ का विमोचन यहां विश्‍व पुस्‍तक मेले में हुआ. जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के भारतीय ...
गांव के बड़े से आंगन उससे भी बड़ी बाखळ में चिड़ी सी चहकती हवाओं सी नाचती महुए सी महकती (और) सर्दी की धूप सी खिलती हमारी बेटी मेमने से खेलती बिल्‍ली से झगड़ती गाय से भागती (और) ऊंट से ...
इब्‍ने बतूता .. एक छाया नेट से. बात शुरू हुई थी इब्‍ने बतूता से! आश्रम से संसद मार्ग जाते हुए यह गाना पहली बार एफएम पर सुना और सुनते ही कान खड़े हो गए. इसके कई कारण हैं.. इतिहास में रुचि होने के ...
उत्‍तर पश्चिमी राजस्‍थान में तूड़ी, चारे नीरे की कमी और संकट पशुधन पर भारी पड़ रहा है. लगातार अनावृष्टि, नहरों में कम पानी के चलते पशुओं के चारे का गंभीर संकट हो गया है और पशु पालना आम लोगों के बस ...

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