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Syndicate contentरहन-सहन

पिछली कड़ियां-1.गोबरगणेश का चिंतन अर्थात गोबरवाद.2.निकम्मों की लीद और खाद निर्माण.3.टट्टी की ओट और धोखे की टट्टी नि त्यकर्म से निवृत्त होने की क्रिया को सभी संस्कृतियों में तरोताज़ा होने, स्वच्छ ...
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दु नियाभर में नारीवादी सोच के लोग औरत aurat शब्द को लेकर ख़फ़ा रहते हैं। उनकी निगाह में महिलाओं के लिए यह बेढंगा और बेइज्जती भरा लफ्ज़ है। आज भी हिन्दी भाषी क्षेत्र की ...
खान-पान की दुनिया की कल्पना आलू के बिना नहीं की जा सकती। दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय पदार्थों में आलू से बने व्यंजनों को निश्चित ही  की जगह यकीनन सर्वोच्च दस स्थानो में है क्योंकि यह हर ...
रो जमर्रा की बोलचाल में सहज शब्द का खूब इस्तेमाल होता है। आखिर यह सहज है क्या? सरल, सामान्य, सुगम या साधारण जैसे अर्थों में सहज शब्द का प्रयोग होता है। वैसे सहज का अर्थ है प्रकृत या साधारण रूप ...
... अपने मित्र, गोबरवाद शब्द के जनक और इस दर्शन के व्याख्याकार,  वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीशकुमार को यह पोस्ट समर्पित है। वे कहते है -“मैं गोबरवाद का प्रवर्तक हूं। गोबर को सम्मान दिलाने की ...
हि न्दी में आमतौर पर बोले जाने वाले और मिलते जुलते शब्द हैं कूप, कूपा या कप। एक जैसे लगते इन शब्दों के अर्थ हालांकि अलग अलग हैं मगर ये एक ही भारोपीय आधार से उठे शब्द हैं। कूप का अर्थ जहां कुआं ...
पिछली कड़ियों-पहले से फौलादी हैं हम…और जब आंख ही से न टपका, तो फिर लहू क्या है....से आगे सं स्कृत में खून के लिए रक्त के अलावा एक अन्य शब्द है शोण जिसका मूलार्थ है लाल रंग। इसमें लालिमायुक्त ...
इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया की हर भाषा में शब्दों का कारवां सचमुच सौदागरों ने ही आगे बढ़ाया। ये सौदागर ही थे जो लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दराज़ देशों से जोखिम उठाकर ...
क भी देवांग नाम के कपड़े  का नाम सुना है? आज जिसे हम टेपेस्ट्री के नाम से जानते हैं, किसी ज़माने में उसका नाम देवांग था। रेशम से मिलती-जुलती किस्म के एक चमकदार कपड़े को ताफता कहते हैं। यह ...
पु राने ज़माने में तुरही जैसे जितने भी वाद्यों का प्रयोग जनसमूह या सेना को सचेत करने, जोश भरने के लिए होता था। सुषिर यानी फूंक से बजाए जानवाले वाद्यों का पोला होना आवश्यक है। इसके संकरे सिरे से ...

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