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Hindi Blogs

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ह म कर्म के चक्र में क्यों उलझते हैं ? कर्मों के इस चक्र का जो वास्तविक कारण है---वो है आवेग. इस बात को थोडा विस्तार से समझने की जरूरत है. मान लीजिए हमने किसी की कोई वस्तु चुरा ली,उसने हमें पकड ...
बामुलाहिजा >> Cartoon by Kirtish Bhattwww.bamulahija.com

5 September, 2010 - 17:08

पानी को कोई न पूछेगायह सोच कर क्या वह निकलता हैकारवां लेकर जो रेगिस्तान में आगे बढता हैउसे तो अपनी करनी हैपाँव अस्थिर, बेचैन वह कहीं न टिकता हैचंचल मन है उसका जो कारवां ले निकलता है होश-हवास खो ...
हर मानव को प्रतिदिन अपनी दिनचर्या बनाकर उसके अनुसार उसे पूर्ण करने का प्रयास करना चाहिये। 1. पिछले दिन का कोई कार्य बाकी रह गया हो तो उसे अगले दिन पूर्ण करना चाहिये।दिनचर्या दिनचर्या दिनचर्या2. ...
पिछले सप्ताह मैंने डिफेंस सर्विसेज वेटरन्स की संगोष्ठी में भाग लिया। इसमें भाग लेने वाले इस पर व्यथित थे कि 1947 से, जब पाकिस्तान ने जम्मू एवं कश्मीर राज्य पर पहला हमला किया था तब से सेना ने भारत ...
  जो स्वार्थी लोग सांसदों को मिलने वाले भाँति भाँति के  भत्तों  और वेतन में बढ़ोत्तरी  का विरोध  कर रहे हैं उनसे मेरा   यह कहना है कि   संसदाई  का  काम अब बहुत कठिन हो चला है | यूँ लोगों का यह भी ...
आज के वक्त में शिक्षा ने अपना एक अलग मुकाम बना लिया है .अब हर बच्चे के लिए शिक्षा का क्या महत्त्व है ये ज्यादातर सभी को  पता है मगर कभी वो भी वक्त था कि सिर्फ लड़कों को ही शिक्षा के योग्य ...
जापान, तरक्की का दूसरा नाम। एक ऐसा देश जिसने सालों-साल तरह-तरह के अजूबे आविष्कारों को जन्म दिया। भिन्न-भिन्न प्रकार के रोबोट, मशीनें, कम्पयूटर, टच स्क्रीन और न जाने किस-किस चीज की वहाँ इजाद ...
पिछले रविवार की चर्चा करते वक्त भूलवश रविवार की शेड्यूल्ड पोस्ट शनिवार को छप गई. सामूहिक प्रकल्पों में इस तरह की त्रुटियाँ कभी कभार हाइड्रोजन बम की तरह धमाका कर जाती हैं. तो, भाइयों ने इसे ...
''चाचाजी....!‘‘ सुबह-सुबह दरवाजा पीटने से मेरी नींद खुल गई थी। लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा था कि गुड्‌डा इस उकताहट के साथ मुझे क्‍यों पुकार रहा है। मैंने तत्‍परता से उठकर दरवाजा खोला। गुड्‌डा मुझे ...
   ॐ भूर्भवः तत्‍सवितुवरेण्‍यं भर्गोदेवस्‍य... ‘‘ओह ! माँ का फिर फोन...'' बकुल गुड़गाँव जाने के लिए तैयार होते हुए चहकी। माँ की तीन साल से बरकरार वही चिरंतन चिंता..., ‘उम्र फिसल रही है। ...
आटोरिक्शा में बैठा तो देखा कि आटोचालक तो अपना परिचित सुखदेव है जो कि पेट्रोल पंप में काम किया करता था। पूछने पर उसने बताया कि पेट्रोल पंप की नौकरी से उसे मालिक ने निकाल दिया तो उसने आटो चलाना शुरू ...
आज रविवार का दिन और आज शिक्षक दिवस है . शिक्षक हमें शिक्षा प्रदान कर हमारे जीवन को एक नई दिशा और रोशनी प्रदान करते हैं . "गुरु बिन ज्ञान अधूरा" इस अवसर पर उनकी भी चर्चा करना बेहद नितांत आवश्यक ...
गूगल से साभारकरामाती इंजेक्शनहोटल के एक कमरे में प्यारे लाल ठहरेअभी आये भी नही थे उन्हेखर्राटे गहरेकि इतने में आवाज सुनी किसी के रोने कीकिसी के सिससने कीकिसी के दर्द से कलपने कीसाँप के फ़ुफ़कारने की ...
परिकल्पना पर आज : गुरु बिनु ज्ञान कहाँ जग माही.... आज शिक्षक दिवस है। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस.......!गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक या टीचर ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को व्याख्यातित ...
साखी पर   देखिये, पढ़िये और अपनी राय दीजिये

5 September, 2010 - 15:47

एक परछाईं सी गुज़रती है खाली खाली कमरों मेंअपलक, अनजान, अनसुनी सी मेरी आँखेंउसे देखती रहती हैं ...परछाईं !आवाज़ देती है उन लम्हों को जिसे कतरा कतरा उसने जिया थाअपनी रूह बनाया था ...लम्हों के कद ...
(अयोध्या का जिन्न फिर बाहर आने को बेताब है। दो दशक पहले हम देख चुके हैं कि हिंदू धर्मान्धता की सीढी पर चढकर भाजपा विहिप ने जो गुल खिलाये थे वे अब कमोबेश बासी पड चुके हैं और नये सिरे से वही गंध फिर ...
मुक्तिका: शतदल खिले.. संजीव 'सलिल' * * प्रियतम मिले. शतदल खिले.. खंडहर हुए संयम किले.. बिसरे सभी शिकवे-गिले.. जनतंत्र के लब क्यों सिले? भटके हुए हैं काफिले.. कस्बे कहें खुद को ...
शाबास है उसकी मर्दानगी को जो पराई स्त्री पर नज़र नहीं डालता !वह नेक और धर्मात्मा ही नहीं, वह सन्त है-तिरुवल्लुवरपर-स्त्रीगमन जान-बूझ कर अपनी पत्नी को व्यभिचारिणी बनाना है-विजयधर्म सुरिश्वर
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