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* आप पहले भी इस ठिकाने पर निज़ार सीरियाई कवि निज़ार क़ब्बानी ( 21 मार्च 1923 - 30 अप्रेल1998 ) की कविताओं के बहुत से अनुवाद पढ़ चुके हैं जिनमें से कुछ इस ब्लाग के मुखिया अशोक पांडे ने किए है और ...
जाने कहाँ मोहब्बत सारी चली गयी,वो बातें प्यारी, यादें निराली,एक पल में ज़िन्दगी सारी बदल गयी.गलतियों के दौर से गुज़रा मैं इस तरह,माफ़ी कि हसरतें भी बदल गयी.यादों को अब जलाऊं, भुलाऊं किस ...
सट्टे पे सत्ता [७ शेर का तोहफा]'पाक ने टॉस जीता, पहले सट्टेबाजी का फैसला'लंदन. लॉर्ड्स टेस्ट से उठे मैच फिक्सिंग के बवाल के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम की हर ओर हंसी उड़ाई ...
यूँ रफ़्तार बहुत ही तेज थी ... टुकड़ो टुकड़ो को समेटा..देखो बन रहा इन्द्रधनुष सा ...कुछ रंग थे इस तरह ...(चाँद ने क्या लिखा रात की हथेली पर ! ! )यूँ चांदनी रात थी.. और ये तुम्हारी ही आहटें ...
यह अतीत से कैसा बंधनम्रदुल बहुत थी मेरी इच्छादेख तुम्हारी हाय अनिच्छातोड़ दिये मैने ही उस क्षण,पेम-परों के सारे बंधनयह अतीत से कैसा बंधनमौंन ह्रदय से तुम्हे बुलायाअपनी ही प्रतिध्वनि को पायामेरे ...
छम-छम करती नन्ही-प्यारी बहना आई है! यह कहते हुए "सरस पायस" ने सबकोअपनी नई-नवेली बहन "रुनझुन" से मिलवाया, जो अभी से ख़ूब मीठी-मीठी बातें करने लगी है! चलिए, कुछ देर के लिए उसकी प्यारी-प्यारी बतियाँ ...
लोगों को घर की याद आती होगी, घरवालों की याद आती होगी। याद आती होगी दोस्तो की, जो कहीं न कहीं नून-तेल-लकड़ी के जुगाड़ में व्यस्त होंगे। किन्ह-किन्ही महानुभावों को अपनी प्रेमिका या प्रेमिकाओं की ...
11 अग 2010 10s by padmsingh in आलेख, पद्म, पद्मसिंह, पद्मावलि, संस्मरण, सरोकार [Edit] जाने क्यों और कैसे … बचपन में मुझे ऊंचाइयों से गिरने और अजीब अजीब सायों के ...
रात कब बीते कब सहर निकले इसी सवाल में उमर निकले तमाम उम्र धडकनों का हिसाब जो हल निकाला तो सिफर निकले बद्दुआ दुश्मनों को दूँ जब भी रब करे सारी बेअसर निकले हर किसी को रही अपनी ही तलाश ...
साल… दिन…शामें…लम्हे… जाने कितने ठहरावों की फेहरिस्त है हमारे माज़ी की डायरी मे…..कभी फुर्सत के पलों मे अचानक कोई सफहा दफअतन उलट गया तो अपनी जमा पूँजी मे से कुछ गिन्नियां तो कुछ कौडियाँ झाँकती ...
""""" वी आर इंडियंस """"" बहुत ज़ोर शोर से विदेश जाने की तैयारी हो रही थी ! नए नए "सूट" सिलवाये जा रहे थे ! "हेयर कट" भी बदल गया था ! आखिर होता भी क्यूँ न यह सब ! विदेश जाने के लिए बड़े ...
नाम: डा. हरदीप कौर संधुजन्म: बरनाल़ा (पंजाब)सम्प्रति: पिछले छह-सात साल सिडनी (आस्ट्रेलिया) में प्रवास ।शिक्षा:पी.एच-डी.( बनस्पति विज्ञान)कार्य : अध्यापनरुचि:हिन्दी-पंजाबी दोनों भाषाओं का ...
थे जितना ही तुम व्याकुल, अपना कृतत्व बताने को था उतना मैं भी व्याकुल, अपना अस्तित्व जताने को जो जितना ही भ्रमित -सा, सपने उतने लेकर आये 'ज्ञानी' फिरता बावरा-सा, अपना सर्वस्व लुटाने को जो जितना ही ...
’जन्माष्टमीला मराठी हंड्या फोडतात आणि गुजराती सातम-आठम खेळून कमवतात!’ हा मनूचा दरवर्षीचा ज्योक.त्यानंतर त्याचं त्यावर स्वत:च हसणं.फवारा उडवून जिवणी फाकवत.मग मी पृथ्वीतलावर नव्यानेच आलोय असं समजून ...
First Page of Phantom Daily D060 - The Wisdom of Solomon
रंग किसे आकर्षित नहीं करते? प्रकृति ने इन्सान को जो तमाम नियामतें बख्शी हैं, उनमें से एक बड़ी काबिलियत विभिन्न रंगों के मध्य सूक्ष्म ...
रात को घर लौटते समय प्रोफ़ेसर कॉलोनी की सड़क पर घुप्प अँधेरे में से होकर चले जा रहे थे, और मस्ती करते हुए तीनों निकले जा रहे थे, पतझड़ का मौसम था तो पेड़ों के पत्ते सड़क पर बिछे हुए थे, और तीनों ...
एक घर के दो साहबान स्टेशन पर पहुँचे, एक को ट्रेन पकड़नी थी मगर वे ज़रा सुस्त थे, दूसरे साहब जो पहुँचाने गये, बहुत तेज़ तर्रार थे, ट्रेन छूटी, ये साहब तो तेज़ थे ही , आव देखा न ताव ट्रेन पर चढ़ गये। ...
अभी कुछ दिनों से लगातार ही समाचार पत्र में छप रहे कुछ समाचार न केवल ध्यानाकर्षण के केंद्र थे,बल्कि बहुत कुछ सोचने को भी बाध्य कर रहे थे...ऐसी बातें जो सोचने को बाध्य करें, प्रेरणा दें और जीवन की ...
बीबीसी मेरा एकमात्र पसंदीदा समाचार स्त्रोत, जिसे मैं करीब जब 8-10 साल का था, तब से सुनता आ रहा हूँ ..दादाजी (जिन्हें हम बाबा कहतें थे) सुनते थे …फिर जब मैंने देश दुनिया को जाना तो उनके साथ बैठकर ...
-------------------------------------------------------------------------------~आशिकी~लोग हमेशा कहते हैं..परवाने की चाहत हैं,शमाँ पर मिट जाने की|पर यह बेदर्द क्या समझेंगे, उस आशिकी को ??जिसको सज़ा ...